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कथा सागर: 25 प्रेरणा कथाएं (भाग 19)

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कथा सागर: 25 प्रेरणा कथाएं (भाग 19)

राजा शर्मा

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कथा सागर: 25 प्रेरणा कथाएं (भाग 19)

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दो शब्द

मुझे गोद ले लो Mujhe God Le Lo

महंगी कार की कब्र Mehangi Kaar Ki Kabr

पत्नी को जवाब Patni Ko Jawaab

कलाकार Kalakaar

नया ज़माना Naya Jamaana

जहरीली मछली Jahreeli Machli

मृत्युदंड का कारण Mrityudand Ka Kaaran

पत्नी को खुश रखना Patni Ko Khush Rakhna

वही लो जो चाहिए Wahi Lo Jo Chahiye

भ्रष्टाचार ही भ्रष्टाचार Bhrashtachar Hi Bhrashtachar

भाई भाई में फरक Bhai Bhai Mein Farak

जीवित या मरी चिड़िया Jeevit Ya Mari Chidiya

माँ के नियम Maa Ke Niyam

पुरानी थाली Purani Thali

व्यापार की कला Vyaapar Ki Kala

कन्फ्यूशियस और बूढा किसान Confucius Aur Boodha Kisaan

खेती करो अन्न पाओ Kheti Karo Ann Pao

चिप्स बेचने वाला Chips Bechne Wala

एक जोड़ी पदचिन्ह Ek Jodi Padchinha

अच्छे काम व्यर्थ नहीं जाते Achhe Kaam Vyarth Nahi Jaatey

आपसे एक घंटा पहले Aapse Ek Ghanta Pahley

बहुमूल्य बातें Bahumoolya Batein

दादाजी के साथ Dadaji Ke Sath

भगवान् मेरे मेहमान Bhagwaan Mere Mehmaan

दया और करुणा Daya Aur Karuna


दो शब्द


विश्व के प्रत्येक समाज में एक पीढ़ी द्वारा नयी पीढ़ी को कथाएं कहानियां सुनाने की प्रथा कई युगों से चलती चली आ रही है. प्रारंभिक कथाएं बोलकर ही सुनायी जाती थी क्योंकि उस समय लिखाई छपाई का विकास नहीं हुआ था. जैसे जैसे समय बीतता गया और किताबें छपने लगी, बहुत सी पुरानी कथाओं ने नया जीवन प्राप्त किया.


इस पुस्तक में हम आपके लिए 25 प्रेरणा कथाएं लेकर आये हैं. यह इस श्रंखला की उन्नीसवीं पुस्तक है. हर कथा में एक ना एक सन्देश है और इन कथाओं में युवा पाठकों, विशेषकर बच्चों, के दिमाग में सुन्दर विचार स्थापित करने की क्षमता है. ये पुस्तक आपको निराश नहीं करेगी क्योंकि ये कहानियां दुनिया के विभिन्न देशों और समाजों से ली गयी हैं.


कहानियां बहुत ही सरल भाषा में प्रस्तुत की गयी हैं. आप अपने बच्चों को ऐसी कहानियां पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करके उनपर बहुत उपकार करेंगे. आइये मिलकर कथाओं की इस परम्परा को आगे बढ़ाएं.


बहुत धन्यवाद


राजा शर्मा


मुझे गोद ले लो Mujhe God Le Lo


केरोलिन का जन्म एक अमीर परिवार में हुआ था. घर में १६ कमरे थे और बहुत से नौकर चाकर थे. उनके पास ५ कारें थी. उसके पिता और माता के साथ साथ वो और उसका भाई भी खूब परिश्रम करते थे.


वो कभी कभी सोचती थी के उसके माता पिता सिर्फ अपने लिए ही काम करते थे. उसके पिताजी एक बहुत ही सफल वकील थे और माँ एक लोकप्रिय लेखिका थी.


पैसा तो बहुत था पर वो कभी भी पैसे की तरफ ध्यान नहीं देते थे. माँ रोज सुबह ८ बजे से रात के ९ बजे तक काम करती थी और लिखती रहती थी.


पिताजी तो बहुत कम ही घर पर दिखते थे क्योंकि वो हमेशा ही अपने ग्राहकों की कानूनी समस्याओं में उलझे रहते थे.


वो १४ साल की थी और उसका बड़ा भाई १७ साल का था. किसी भी परेशानी के समय में उसका बड़ा भाई ही उसके साथ खड़ा रहता था और उसको सहारा देता था. वो बड़ा भाई उसको बहुत प्यार करता था.


आज जब वो उस समय के बारे में सोचती है तो उसको अपने बड़े भाई की सबसे अधिक कमी महसूस होती है. वो हमेशा कहती है, "काश मेरे पिताजी के इतने शत्रु ना होते!" उनके शत्रुओं ने ही उनके घर को आग लगा दी थी.


वो कहती है के वो अपनी माँ को जिम्मेदार ठहराती है क्योंकि उन्होंने ही पिता को इतने शत्रु होते हुए भी कुछ नहीं कहा था. उसके पिता जी अक्सर उसपर अपना गुस्सा निकलते थे.


सोमवार की एक रात वो अपने कमरे में थी और संगीत सुनने के साथ साथ अपने स्कूल का काम भी कर रही थी. उसका बड़ा भाई गिटार बजा रहा था. उसकी माँ अपने दफ़्तरनुमा कमरे में थी और पिता जी हमेशा की तरह घर से बाहर ही थे.


अचानक बाहर के दरवाजे पर हुई एक जोरदार दस्तक ने उसको डरा दिया. उसने खिड़की से बाहर देखा के पांच सूट पहने हुए पुरुष बाहर खड़े थे. वो तुरंत अपने कमरे से बाहर आयी और सीढ़ियों से नीचे अपने माँ के कमरे में गयी और उन लोगों के बारे में बताया.


माँ ने गुस्से में कहा, "मेरे काम में बाधा पहुंचाने के लिए तुम्हारा धन्यवाद."


उसने कहा, "माँ, माफ़ कर दीजिये, पर नीचे पांच लोग आये हैं."


माँ के चेहरे का भी रंग उड़ गया और वो दौड़कर खिड़की की तरफ गयी. माँ ने केरोलिन की तरफ देखा और फिर दरवाजा खोलने के लिए गयी.


उनमें से एक व्यक्ति ने उसकी माँ के बाल पकड़ लिए और बाकी चारों ने अपने अपने जेब में से पिस्तौलें निकाल ली और उसपर तान दी, "पैसा कहाँ है?"


उसका भाई भी दौड़ कर नीचे आया, परन्तु एक व्यक्ति ने उसको गले से पकड़कर जोर से धक्का दिया और उसका भाई सोफे पर जा गिरा. भाई चिल्लाया, "हमको छोड़ दो! हमने क्या किया है?"


उसकी माँ को उस व्यक्ति ने धक्का देकर फर्श पर गिरा दिया. माँ जोर से चिल्लाई, "तुम लोगों को क्या चाहिए है?" उस व्यक्ति ने निशाना लेकर मेज पर रखे हुए शानदार कांच की एक मूर्ती को उड़ा दिया.


उसका भाई चिल्लाया, "मेरी माँ को कुछ मत करो. कृपया हमारी माँ को छोड़ दो."


दो घंटे तक इसी प्रकार का ड्रामा चलता रहा. उनमे से एक ने कहा, "अपने पिताजी को कुछ मत कहना, वरना तुमको अंजाम भोगना होगा."


उन्होंने माँ के पर्स में से उनके पैसे निकाल लिए और हँसते हुए चले गए. सबसे लम्बे व्यक्ति ने केरोलिन की तरफ देखकर हँसते हुए आँख मार दी.


माँ ने दोनों बच्चों को सांत्वना देते हुए कहा, "डरो मत, कुछ नहीं हुआ. ये तुम्हारे पिताजी के शत्रु हैं."


एक घंटे के बाद उसके पिता घर आ गए. उन्होंने अपना ब्रीफकेस नीचे रखा और माँ को चूमा. उन्होंने कुछ भी नहीं कहा और चुपचाप ऊपर चले गए. वो हैरान थी के उसके माता पिता ने कोई भी प्रतिक्रिया क्यों नहीं दिखाई थी.


वो हैरान थी के पिताजी ने मेज पर टूटी हुई कांच की मूर्ती नहीं देखी थी, माँ के बिखरे हुए बाल नहीं देखे थे, उसके भाई के गालों पर आंसू नहीं देखे थे.


अचानक उसके भाई ने कहा, "तुमको कुछ जलने की गंध नहीं आ रहीं?"


उसने जल्दी से खिड़की से बाहर देखा. वो पांचों लोग वापिस आ गए थे. उन्होंने घर के बाहर की दीवारों पर पेट्रोल छिड़कना शुरू कर दिया और घर को आग के हवाले कर दिया. सब कुछ जल कर ख़ाक हो गया और वो कुछ नहीं कर सके.


वो कहती है के उसको कुछ भी याद नहीं के वो कैसे बच गयी थी. उसको एक अनाथालय में भेज दिया गया. उसके चेहरे पर और गले पर कुछ घाव अवश्य थे. वो बहुत लम्बे समय तक सोचता रही, "मैं ही क्यों बच गयी."


एक दिन एक पति पत्नी अनाथालय आये. वो एक किशोरी को गोद लेना चाहते थे. अनाथालय की एक सेविका ने उसकी तरफ देखा और मुस्कुराई.


पति का नाम रोनाल्ड था और पत्नी का नाम केट था. उसने अपना परिचय दिया, "मेरा नाम केरोलिन है. में इस बरस १७ साल की हो गयी हूँ."


केट ने कहा, "क्या तुम हमारे साथ हमारे घर जाना चाहोगी? हमारा घर बहुत अच्छा है. तुमको अपना अलग से एक कमरा मिलेगा. हम लोग कल आएंगे और तुमको यहां से ले जाएंगे." पति पत्नी दोनों ने केरोलिन को गले से लगाया और वहां से चले गए.


उनके जाने के बाद केरोलिन बहुत ही खुश थी. तीन साल से वो उस अनाथालय में रह रही थी और अब वो एक परिवार के साथ रहने को जा रही थी. उसको परिवार में प्यार मिलने वाला था और प्यार की ही उसको सबसे अधिक आवश्यकता थी.


उस रात वो चैन की नींद सोइ और मीठे सपनो में खोई रही.


अगली सुबह जब वो पति पत्नी आये, उनके चेहरों पर मुस्कान थी. केट ने कहा, "केरोलिन तुम घर जाने को तैयार हो?"


केरोलिन ने हिचकिचाते हुए कहा, "जी, हां, हां, मैं तैयार हूँ."


दोनों साथ साथ ही बोले, "आओ अमांडा आओ हम अपने घर चलें."


उनके घर में कुछ दिन रहने के बाद केरोलिन को मालूम चला के उनकी १५ साल की बेटी अमांडा को कुछ गुंडे उठा कर ले गए थे. उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया और फिर उसको मार कर नदी में फेंक गया था."


केट और रोनाल्ड बहुत ही खुश थे. दोनों नो घर में केरोलिन को लाने के बाद बारी बारी से उसके माथे को चूमा और कहा, "हमारी अमांडा आज घर वापिस आ गयी है."


आज केरोलिन के अपने तीन बच्चे हैं और वो तीनो कॉलेज में पढ़ते हैं. बूढ़े केट और रोनाल्ड अपने पोते पोती को बहुत प्रेम करते हैं.


केरोलिन ने अभी तक अपने दो बेटों और एक बेटी को ये नहीं बताया है के केट और रोनाल्ड केरोलिन के असली माँ बाप नहीं हैं. उसके पति ने ही केरोलिन से कहा था के बच्चों को अपने दुखद जीवन के बारे में कुछ ना बताये.


केरोलिन अब एक लोकप्रिय लेखिका है और अपनी माँ की तरह लेखन कला शायद उसको विरासत में ही मिली है. अपनी आत्मकथा के अंतिम पेज पर उसने लिखा है के, "माँ बाप को जहाँ तक हो सके अपने डरावने भूत के बारे में अपने बच्चों को नहीं बताना चाहिए."


मित्रों,


आप को भी आभास होगा के माँ बाप के बिना बच्चों का जीवन कितना कठिन होता है. ऐसे बच्चे जिनके माँ बाप और भाई बहिन किसी दुर्घटना में मर गए होते हैं, उन बच्चों को सारा जीवन बुरी यादों का बोझ लेकर ही जीना पड़ता है.


जहाँ तक हो सके किसी ना किसी अनाथालय में अवश्य जाइये और वहां रह रहे अनाथ बच्चों को थोड़ी सी खुशियां देने का प्रयास कीजिये. आप कुछ पैसे खर्च करके किसी एक बच्चे का जीवन तो बना ही सकते हैं.


महंगी कार की कब्र Mehangi Kaar Ki Kabr


ब्राज़ील में एक दिन सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक ने घोषणा की के वो अपनी दस लाख डॉलर की बेंटले कार को कब्रिस्तान में गाड़ देगा ताकि मरने के बाद वो दूसरी दुनिया में उस कार को चला सके.


क्योंकि वो ब्राज़ील के सबसे अमीर लोगों में से एक था, इस घोषणा को समाचार पत्रों, टेलेविज़न, रेडियो, और पत्रिकाओं ने बहुत बढ़ा चढ़ा कर बयान किया और उस अमीर व्यक्ति की बहुत आलोचना की.


सभी कहने लगे के १० लाख डॉलर गरीबों को दान दे देता तो कितने लोगों का जीवन बदल जाता.


उसने कार को जमीन में गाड़ने की तिथि भी घोषित कर दी. उसकी आलोचना बढ़ती ही गयी. कई समाचार पत्रों ने तो यहां तक कह दिया के वो अमीर व्यक्ति पागल हो गया था.


निर्धारित दिन कब्रिस्तान में एक बड़ा सा गड्ढा खोदा गया. बहुत से पत्रकार और टेलीविज़न के लोग भी वहां उपस्थित थे. कब्रिस्तान में लाखों लोग एकत्रित हो चुके थे.


अचानक उस अमीर व्यक्ति ने एक मंच पर खड़े होकर एक माइक पर बोलना शुरू कर दिया, "मैंने अपनी इस महंगी कार को जमीन में गाड़ने का कार्यक्रम स्थगित कर दिया है."


वहाँ उपस्थित सभी लोग बहुत ही हैरान और परेशान हुए. तभी उस अमीर ने फिर से माइक पर बोलना शुरू कर दिया, "मैंने ये घोषणा और इतना नाटक सिर्फ जनता का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए किया था.


मैं लोगों में अंग दान करने की चेतना जाग्रत करना चाहता हूँ. लोग मेरी आलोचना कर रहे थे के मैं इतनी महंगी कार जमीन में गाड़ने जा रहा था, परन्तु सभी लोग इस कार से भी मूल्यवान चीज़ें जमीन के नीचे गाड़ देते हैं.


लोग अपने ह्रदय, गुर्दे, फेफड़े, आँखें, सभी कुछ तो अपने मृत शरीर के साथ जमीन में गाड़ देते हैं. लाखों लोग दुनिया में ऐसे हैं जिनको जीवन जीने के लिए दान में इन अंगो की जरूरत है. आप अपने ठीक ठाक अंगों को जमीन में गाड़ देते हैं.


अगर आप लोग अपनी मृत्यु से पहले ही अपने अंग दान कर देंगे तो लाखों लोगों के जीवन बचाये जा सकेंगे. मैं आप सब लोगों को जागृत करना चाहता था इसीलिए इतना बड़ा नाटक किया. असुविधा के लिए मैं आप सभी से माफ़ी मांगता हूँ."


वो अमीर व्यक्ति मंच से नीचे उतर गया और अपनी कार की तरफ चल दिया. उसकी आँखों में आंसू थे. कब्रिस्तान लाखों लोगों की तालियों की आवाज़ से गूंजने लगा.


मित्रों,


मृत्यु के बाद हमारा शरीर तो व्यर्थ ही होता है फिर चाहे उसको जला दिया जाए, पानी में बहा दिया जाए, या जमीन में गाढ़ दिया जाए.


हो सके तो अपने अंग दान कर दीजियेगा. आपके मरने के बाद भी आपका कुछ अंश और लोगों के शरीर में जीवित रहेगा. आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद.


पत्नी को जवाब Patni Ko Jawaab


उनके विवाह को दस वर्ष हो गए थे. दोनों पति पत्नी अपने अपने दफ्तरों में काम करते थे और मिलकर पैसे कमाते थे. उन दोनों ने शादी से पहले ही निर्णय ले लिया था के वो दोनों अपने अपने बूढ़े माता पिता के लिए गाँव में हर महीने पैसे भेजा करेंगे.


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